Ayurvedic Herbs

Arjun ke gunn aur fayde | अर्जुन के गुण और फायदे

Arjun अर्जुन

इसे अन्य भाषाओ में अर्जुन, कुकुभ, सादड़, Arjun  आदि नामो से जाना जाता है। अर्जुन का वृक्ष हिमालय की तलहटी, बर्मा, मध्य भारत, उत्तरी पूर्वी भारत, छोटा नागपुर, सीलोन, बंगाल आदि। जगहों पर नदी-नालो के किनारे पाया जाता है। जिस जगह ये प्राकृतिक तौर पर नहीं होता है। वहां ये बो कर पैदा किया जाता है।

अर्जुन का सामान्य परिचय

अर्जुन का वृक्ष जंगलो में प्राकृतिक तौर पर उगता है। इसकी ऊंचाई कम से कम 60 से 80 फ़ीट तक और पेड़ की गोलाई 10 से 20 फ़ीट तक होती है। इसके पत्ते का आकर मनुष्य के जीभ के समान होता है और पत्तो के पीछे डंठल पर दो गांठ होती है। जो बाहर से दिखाई नहीं देती है। गर्मी के मौसम में इसके फूल आते है। इसके फूल बहुत छोटे, हरी झाई लिए हुए सफ़ेद, खाकी भूरी या बैगनी रंग की तरह साफ़ होती है। छाल में से खाकी रंग निकलता है। इसकी लकड़ी जलाकर इसकी राख रंगने के काम आती है। झाड़ में एक प्रकार का साफ़, सुनहरा, भूरा और पारदर्शक गोंद लगता है। जो खाने के काम में आता है।

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Arjun ke ayurvedic gunn अर्जुन के आयुर्वेदिक गुण

  • ये कसैला, मधुर, उष्ण, शीतल, कांतिजनक, बलकारक होता है। ये अस्थिभंग, कफ, पित्त, दाह, प्रमेह, ह्रदय रोग, पांडुरोग, रुधिरविकार, पसीना, श्वांस, भस्मरोग आदि रोगो को नाश करता है।
  • सुश्रुत के अनुसार इस पौधे की राख को सर्पदंश के काम में ली जाये तो तो व्यक्ति बच सकता है।
  • वाग्भट्ट के अनुसार बिच्छू के डंक पर इसका छिलका उपयोग किया जाये तो लाभ मिलता है।

Arjun ke labh ya fayde अर्जुन के लाभ या फायदे

  • अर्जुन के 250 ग्राम छाल को 2 लीटर पानी में उबाले जब पानी एक लीटर बचे। इसे एक साफ़ बोतल में रख ले। 10-10 मिली. सुबह शाम लेने से ह्रदय सम्बंधित रोंगो को दूर करता है और रक्त को शुद्ध करता है।
  • Arjun के छाल को रातभर जल में भिगोकर रखे। सबेरे उसको मलकर, छानकर या उसको घोटकर उसका क्वाथ पीने से रक्तपित्त में लाभ पहुँचता है।
  • सादड़ के छाल को बकरी के दूध में पीसकर उसमे दूध और शहद मिलाकर पीने से रक्तातिसार दूर होता है।
  • शुक्रमेह या धात रोग में इसके छाल को या श्वेत चन्दन का क्वाथ पिलाने से लाभ होता है।
  • मूत्राघात रोग में Arjun की छाल के अंदर का भाग का क्वाथ बनाकर पिलाने से बहुत लाभ होता है।
  • कुकुभ की छाल के चूर्ण में अडूसे के पत्तो के स्वरस की सात भावना देकर शहद, मिश्री या गाय का शुद्ध घी ले। के साथ चटाने से क्षय की खांसी या कफ के साथ खून आता हो नष्ट कर देता है।
  • गेंहू और Arjun के वृक्ष की अन्तरछाल को बकरी के दूध और गाय के घी में पका ले। उसमे मिश्री और मधु मिलाकर चटाने से अति उग्र ह्रदय रोग मिटता है।

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