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दस्त या डायरिया के लक्षण कारण और बचने के उपाय

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Written by Ram Kumar

सामान्य रूप से पतले बिना मरोड़ के मल का बार-बार आना अतिसार, दस्त या डायरिया Dast ya Diarrhea रोग कहलाता है। यह एक जाना-पहचाना बच्चों, जवानों और बूढ़ों सभी को हो जाने वाला आम रोग है। डायरिया को शिशुओं की मौत का बड़ा कारण माना गया है। दस्त लगने से शरीर में पानी और खनिज लवण निकलने से शरीर को जरुरी पोषण नहीं मिल पाता है।

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दस्त या डायरिया होने के कारण

  • डायरिया उत्पन्न होने के प्रमुख कारणों में एकाएक मौसम बदलने, ज्यादा खाना, दूषित फल और पानी का सेवन, अति शीतल जल, बर्फ अधिक खाना |
  • भारत में दूषित पानी डायरिया की बड़ी वजह है | गर्मियों में दूषित पानी के ज्यादा सेवन से बहुत बड़ी पेट में बहुत बड़ी मात्रा में अशुद्धियां चली जाती है जो डायरिया , उल्टी तथा अन्य बिमारियों की वजह बनती है |
  • फ़ूड पॉइजनिंग से भी दस्त लग जाते है |
  • गर्मियों में तेज मिर्च मसाले वाला भोजन खाने से भी डायरिया हो जाता है |
  • सर्दियों और बारिश के मौसम में वायरल इंफेक्शन से सबसे ज्यादा डायरिया होता है।
  • भोजन के पाचन के पहले ही दुबारा भोजन करना, पेट में कृमि होना, भय, शोक, दुःख, मानसिक तनाव , कम नींद लेने से भी अतिसार आदि होते हैं।
  • पेट में बैक्टेरिया के संक्रमण |
  • दवाई की एलर्जी, साइड इफेक्ट्स या रिएक्शन |
  • खाने पीने की चीजो में मिलावट से खास तौर पर दूध,पनीर ,बासी मीट खाने से से भी डायरिया हो जाता है |
  • डायबिटीज के मरीज को भी डायरिया जल्दी-जल्दी होता है |

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दस्त या डायरिया होने पर क्या करे

  • जीवन रक्षक घोल यानी ओ.आर.एस. घोल या एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी और चुटकी भर नमक मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद एक-एक कप पिएं।
  • भोजन के रूप में दही-चावल या खिचड़ी खाएं।
  • चावल का धोवन (चावल उबलने के बाद बचा हुआ गाढ़ा सूप ), मूंग या मसूर की दाल का सूप, साबूदाना की खीर, छाछ या दही इच्छानुसार सेवन करें।
  • सेब का मुरब्बा, या केले और चावल खाना चाहिए |
  • दोपहर के भोजन में लौकी का रायता या दही की लस्सी लें।
  • एक कप दही में एक केला मिलाकर सुबह, दोपहर, शाम सेवन करें।
  • नीबू, मौसमी, संतरे, अनार का जूस लें।
  • कच्चा, पका पपीता, गन्ने का रस, मीठा सेब खाएं। बेल का मुरब्बा भी खा सकते हैं।
  • डायरिया होने पर शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है इसलिए गाजर का सूप पियें |

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दस्त या डायरिया से बचने के उपाय

1-अतिसार होने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसलिए अधिक से अधिक पानी पिएं। पानी का सेवन करने से निर्जलीकरण नहीं होगा। इसलिए नमक के छोटे-छोटे टुकड़े चूसकर खाएं। नमक और पानी का घोल बनाकर प्रयोग करें। लेकिन बाहर का पानी पीने से बचें। घर का साफ़ और उबला पानी पिएं। हैंडपम्प का पानी न पिएं।

2-डायरिया होने पर शरीर के अंदर से तरल लवण बाहर निकलते हैं। इनकी कमी को पूरा करने के लिए ओआरएस (ORS) का घोल बनाकर पिएं।

3-अतिसार होने पर बाहर का तला भुना और मसाले वाला खाना व बासी खाने से परहेज़ करें। सदैव घर का बना ताज़ा खाना ही खायें।

4-खाने की चीज़ों को अच्छी तरह से धोकर पकाएं।

5-डायरिया होने पर भोजन बिलकुल बंद न करें। बल्कि चावल, केला व सेब के मुरब्बे का सेवन करें। खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोकर तब आहार का सेवन करें।

6-अतिसार के उपचार में चावल बहुत फायदेमंद है। चावल आंतों की गति को कम करके दस्त को बांधता है।

7-यदि आपको डायरिया एंटीबायोटिक खाने की वजह से हुआ हो तो दही का अधिक से अधिक सेवन करें। क्योंकि दही में उपस्थित प्रो-बायोटिक एक प्रकार के जीवंत बैक्टीरिया होते हैं, जो आपके पाचन प्रणाली को सुचारू रूप से चलाते हैं। दही खाने पर ये बैक्टीरिया आँतों में पुनः स्थापित होकर अतिसार (दस्त) के प्रवाह को रोकते हैं।

8-डायरिया में गोभी , आलू जैसी सब्ज़ियों का सेवन करने के बजाय भिंडी , लौकी आदि मौसमी सब्ज़ियों को खाएं।

9-संतरा , अंगूर , तरबूज , ककड़ी जैसे मौसमी फल खाएं।

10-डायरिया में नींबू पानी , आम पना , बेल या गुड़ का शरबत आदि का सेवन बहुत फ़ायदेमंद है।

11-अदरक का सेवन करने से अतिसार में राहत मिलती है। अदरक की चाय पीने से पेट की तकलीफ़ कम होती है। अदरक का रस, नींबू का रस और काली मिर्च का पाउडर पानी में मिलाकर पीने से राहत मिलती है।

12-डायरिया होने पर दूध और उससे बनी हुई चीज़ों का प्रयोग न करें। क्योंकि दूध या उससे बने हुए खाद्य पदार्थ आसानी से पच नहीं पाते।

13-डायरिया होने पर पेट में मरोड़ की समस्या होने लगती है। इससे जल्द छुटकारा पाने के लिए पेट की तनावयुक्त मांसपेशियों को गर्म पानी की थैली या किसी हीटिंग पैड से सेंक दें।

14-डायरिया में किसी भी प्रकार की तकलीफ़ होने पर शरीर को पूरा आराम देना अत्यधिक ज़रूरी है। क्योंकि आराम करने से शरीर को अतिसार के किसी भी वायरस से लड़ने की शक्ति मिलती है।

नोट:- डायरिया की गम्भीर स्थिति होने पर चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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