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क्या आप गले की खांसी से है परेशान ! आइए जाने घरेलु उपाय ….

खांसी KHANSI मौसम में बदलाव आते ही और सर्दी का मौसम आते ही लोग बीमार पड़ने शुरू हो जाते हैं। इसके कई कारण होते है जैसे कि ठण्ड लगना, खांसी, जुखाम, गले का इन्फेक्शन होना आदि। इन दिनों में इन्फेक्शन होने से और ठण्ड से खांसी लगातार बनी रहती हैं जिसके कारण छाती में बलगम जमा हो जाता है। हालांकि इससे कोई खतरा नहीं होता है लेकिन यह सामान्य जीवन को असहज बना देता हैं। बलगम वाली खांसी का अगर समय इलाज नहीं किया जाए तो यह अन्य बीमारियों का कारण बन सकता हैं।

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खांसी के प्रकार KHANSI KE PARKAR

ये मुख्यतः तीन प्रकार की होती है :-

बलगम की खांसी :- इस खांसी की पहचान ये है की खांसी के साथ बलगम भी आती है, और कभी-कभी बलगम के साथ खून भी आने लगता है।

सूखी खांसी :- इस खांसी में बलगम या कफ नहीं निकलता है।

कुकुर खांसी :- ये खांसी बहुत ही हानिकारक होती है। ये जब एक बात आना शुरू आता है, तो कुछ समय तक आता रहता है।

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सर्दियों में खांसी आने के प्रमुख कारण KHANSI AANE KE KARAN

  • खांसी आने का प्रमुख कारण गले में इन्फेक्शन या संक्रमण होना है। सर्दियों के मौसम में गले में इन्फेक्शन बहुत जल्दी हो जाता है। गले में इन्फेक्शन का मुख्य कारण बैक्टीरिया है। गले में इन्फेक्शन बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है जिसमें गले की श्लेष्म झिल्ली में सूजन आ जाती हैं।
  • खसरा, निमोनिया, श्वास नाली में सूजन होना, आंतरिक बुखार होना भी खांसी का कारण बन सकता है।
  • जो लोग धूम्रपान करते है खासकर उनको खांसी ज्यादा आती है।
  • केला, अखरोट, बादाम, पिस्ता आदि चीजे खाने के तुरंत बाद पानी पी लेने से खांसी आना शुरू हो जाता है।
  • सर्दी के समय में ठंडी चीजो की ज्यादा मात्रा में सेवन करने से गले में इन्फेक्शन हो जाने से खांसी का कारण बन जाता है।
  • अधिक घी, तेल से बनी हुई चीजों का सेवन करना भी खांसी का कारण बन जाता है।

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खांसी के रामबाण आयुर्वेदिक इलाज KHANSI KE RAMBAN AYURVEDIC ILAJ

  • अडूसे की जड़ की छाल 250 ग्राम, 2 लीटर पानी में उबाल कर आठवा अंश शेष रहने पर छान लें। इस क्वाथ में 2 किलो चिन्नी डाल कर पकाएं, शहद जैसा गाढ़ा होने पर उतार लें और ठंडा होने पर बोतल में डाल लें। यह सभी प्रकार की खासी में काम करता है। तथा राजयक्षमा तथा रक्तप्रदर में उपयोगी है।
  • कायफल, पोहकरमूल, काकड़ासिंगी और पीपल इनका महीन चूर्ण बना लें। और शहद के साथ चटाएं। इससे कफवाली खाँसी और दमा में फायदा मिलता है। मामूली खासी तो तुरंत ठीक हो जाती है।
  • सुहागे का लावा या फिटकरी का लावा 250 मिलीग्राम में 125 मिलीग्राम अभ्रक भस्म मिलाकर चाटने से सूखी खाँसी में आराम मिलता है।
  • 12 ग्राम हल्दी, सज्जीखार 3 ग्राम ओर पुराना गुड़ 24 ग्राम की बेर के बराबर गोलियां बना लें। इसको मुहँ में डालकर चूसने से सब प्रकार की खासी में आराम मिलता है। विशेषकर शीतकालीन में होने वाली खासी में तुरंत आराम मिलता हैं।
  • कटेरी और अडूसे का काढ़ा में शहद और पीपल चूर्ण डालकर पिने से पुरानी कफवाली खाँसी में आराम मिलता है।
  • स्वर्गसुन्दर रस, मरिचादि गुटिका, ऐलादी वटी, सितोपलादि चूर्ण आदि आयुर्वेदिक दवाइयाँ लेने से पुरानी से पुरानी खासी में तुरंत आराम मिलता है।
  • हल्दी के 2 ग्राम चूर्ण में थोड़ी सी मात्र में सेंधा नमक मिलाकर ऊपर से पानी पीने से खासी में आराम मिलता है ।
  • बांस का रस, अदरक का रस आदि को मिलाकर उसमें शहद मिलाकर कुछ समय तक सेवन करने से भी खांसी में आराम मिलता है ।
  • 3-4 लौंग को पीसकर शहद के साथ एक दिन में मात्र 3-4 बार चुटकीभर चाटने पर खांसी में आराम मिलता है ।
  • छोटी कटेरी के फूलों को 2-3 ग्राम केसर के साथ पीसकर शहद के साथ लेने से खांसी में आराम मिलता है ।
  • सुहागे का फूला और मुलहटी को अच्छी तरह कुट-पीसकर कपडे छान कर मैदे की तरह बारीक़ चूर्ण बना लें । इनको बराबर मात्रा में मिलाकर किसी बोतल में डाल कर दिन में दो बार सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है ।

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