Disease

गॉलब्लेडर की पथरी को दूर करने के उपाय

loading...
pittashay-me-pathri
image source google
Written by Ram Kumar

‘पित्ताशय Gall Bladder’ हमारे लीवर के साथ जुड़ा हुआ एक अवयव है जो लीवर के नीचे स्थित होता है। यह थैली रूपी अंग है जिसका आकर नाशपाती जैसा होता है।

gallbladder-kya-hai

image source google

पित्ताशय (Gall Bladder) का कार्य

इसका कार्य मुख्य कार्य है पित्त का संग्रह करके रखना।

यह पित्त को गाढ़ा करके संग्रह करता है जिससे कम जगह में अधिक संग्रह हो सके।

जब शरीर को पित्त की आवश्यकता होती है तब इसी संग्रह किये हुए पित्त पित्त नली के माध्यम से छोटी आंत में पित्त का स्त्राव किया जाता है।

पित्त (Bile) क्या है ?

‘पित्त’ एक पाचक रस है जो कि लीवर द्वारा बनाया जाता है। यह वसायुक्त पदार्थों के पाचन में मदद करता है। यह पित्त हमारे शरीर को किसी प्रकार का नुकसान ना पहुंचाए इसका ख्याल रखता है।

पित्ताशय की पथरी (Gallstone)

pittashay-me-pathri

image source google

गाल स्टोन्स एक बहुत ही आम समस्या है।

पित्ताशय के अन्दर पथरिया उत्पन्न होती है लेकिन ये पथरिया वहा से बाहर निकलकर पित्त मार्ग के अन्य अवयवों में भी पहुंच सकती है जैसे पुटीय नलिका, सामान्य पित्त नलिका, अग्न्याशयीय नलिका या एम्प्युला ऑफ वेटर।

पित्ताशय में पथरियों की होने की अवस्था को चिकित्साशास्त्र में कोलेलिथियेसिस (cholelithiasis) कहा जाता है (यूनानी शब्द: chol -, “bile” + lith -, “stone” + iasis -, “process”)।

पथरी की वजह से पित्ताशय में सुजन (cholecystitis) पैदा हो सकती है।

ये भी पढ़े….हैजा: कॉलरा

पित्ताशय की पथरी : प्रकार

पथरी किस रसायन के संघटन से बनी है इसके आधार पर उन्हें निम्न प्रकारों में विभक्त किया जा सकता है

कोलेस्ट्रॉल पथरियां (Cholesterol Gallstones)

यह पथरियां विभिन्न रंगों की हो सकती है।

यह हलके पीले रंग से लेकर गहरे हरे या भूरे रंग की होती है।

इसका आकार अंडे के समान होता है तथा यह 2 से 3 सेमी लम्बी हो सकती है।

वर्णक पथरियां (Pigment Gallstones)

वर्णक पथरियां छोटी, गहरे रंग की पथरी होती है।

यह पित्ताशय में पाए जाने वाले बिलिरूबिन और कैल्सियम के लवणों से बनी होती है।

इनमे कोलेस्ट्रौल की मात्रा 20 प्रतिशत से भी कम होती है।

पित्ताशय की पथरी : आकार और संख्या

पथरियां विभिन्न आकार को होती हैं, ये रेत के एक कण से लेकर गोल्फ की गेंद जितनी बड़ी हो सकती है।

पित्ताशय में एक बड़ी पथरी या कई छोटी पथरियां मौजूद हो सकती है।

यह पथरी सैकड़ों की संख्या में हो सकती है।

ये भी पढ़े….उल्टी से बचने के घरेलु नुस्खे

पित्ताशय की पथरी : लक्षण

पित्ताशय की पथरी कई वर्षों तक लक्षणरहित भी रह सकती है।

आमतौर पर 85 प्रतिशत लोगों के पित्ताशय में यह पथरी चुपचाप पड़ी रहती है।

इनसे कोई कष्ट नहीं होता। पित्ताशय की ऐसी पथरी को “साइलेंट स्टोन” कहते है।

आमतौर पर लक्षण तब दिखने शुरू होते हैं, जब पथरी एक निश्चित आकार प्राप्त कर लेती है।

पित्ताशय की पथरी का मुख्य लक्षण  >> पथरी का दर्द :-

व्यक्ति को पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में अत्यधिक दर्द होता है, जिसके बाद प्रायः मिचली और उल्टी आती है, जो 30 मिनट से लेकर कई घंटों तक तकलीफ़देह हो सकती है।

किसी मरीज़ को ऐसा ही दर्द कंधे की हड्डियों के बीच या दाहिने कंधे के नीचे भी हो सकता है।

अक्सर ये दर्द विशेषतः वसायुक्त भोजन करने के बाद आते है।

यह दर्द कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों तक बना रह सकता है एवं सामान्य से लेकर अत्यंत पीड़ादायक भी हो सकता है।

लगभग हमेशा ही यह दौरे रात के समय आते है।

अन्य लक्षण :-

  • पेट का फूलना
  • वसायुक्त भोजन के पाचन में समस्या
  • डकार आना
  • गैस बनना
  • बीमार अनुभव करना
  • तेज बुखार, कंपकंपी और पसीना आना
  • त्वचा और आँखों के सफ़ेद हिस्से का पीला पड़ना (पीलिया)।
  • मिट्टी के रंग का मल और चाय के रंग का मूत्र
  • मतली और उल्टी
  • अपच, इत्यादि।

ये भी पढ़े….दस्त या डायरिया के लक्षण कारण और बचने के उपाय

पित्ताशय की पथरी : कारण

पित्ताशय की पथरी के निर्माण के जोखिम को बढ़ाने वाले कारण और अवस्थाएं कुछ इस प्रकार है।

  • आंतों में विष द्रव्यों का जमा होना
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना
  • मोटापा : अधिक वज़न होना
  • गलत आहार और आहार पद्धति :
    • भोजन में फ़ाइबर की कम मात्रा
    • उच्च कोलेस्ट्रौल (तेलयुक्त) युक्त भोजन
    • उच्च स्टार्च और शक्कर युक्त भोजन
  • पुराना कब्ज़
  • पानी कम पीना
  • व्यायाम की कमी
  • नींद की कमी
  • डायबिटीज (मधुमेह)
  • तेजी से वजन घटना (क्रेश डायटिंग)
  • ज्यादा भूखा रहना
  • उम्र : 30 से 40 वर्ष में सबसे ज्यादा वैसे किसी भी उम्र में हो सकती है।
  • लिंग : पुरुषों की तुलना में महिलाओं में दो गुना ज्यादा होने की आशंका।
  • आनुवांशिक।

ये भी पढ़े….विभिन्न रोंगो में अनार के फायदे

रोगों का मूल कारण : एक गहेरी खोज

आज कल कीटाणु से होनेवाले और अन्य रोग बढ़ते जा रहे हैं। अधिकतर लोग वातावरण और खाने पीने के कीटाणु, वातावरण के केमिकल या अन्य बाहरी घटकों को इसका कारण मानते हैं।

लेकिन यह अर्ध-सत्य हैं।

एक ही तरह के वातावरण में रहने वाले और एक जैसा बाहर का खाना खाने वाले अनेक लोगों से सिर्फ कुछ लोग बीमार पड़ते है।

ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अधिकतम रोगों का मुख्य कारण कीटाणु या बाहरी घटक नहीं, लेकिन “कमजोर आंतरिक उपचारक  तत्व “ हैं।

अगर हमारा आंतरिक उपचारक तत्व सशक्त है, तो वह हर तरह के कीटाणु और बीमारी से हमारी रक्षा करता है।

अगर पित्त की पथरी जैसे रोग और इलाज की दर्दनाक यातनाओं से बचना हैतो हमारी आंतरिक उपचारक  तत्व को सशक्त बनाना आवश्यक है।

ये भी पढ़े….लीवर सिरोसिस क्या है

आंतरिक उपचारक तत्व क्या है

इस विश्व में सिर्फ एक उपचारक तत्व है और वह हमारे भीतर है।

आंतरिक उपचार पद्धति में, इसे आंतरिक उपचारक या आंतरिक उपचारक तत्व कहते है। यह उपचारक तत्व, अनंत प्रज्ञा और अनंत शक्ति का खजाना है।

माँ के गर्भ में, एक सूक्ष्म पेशी में से हमारे संपूर्ण शरीर का निर्माण इसी अनंत प्रज्ञा द्वारा हुआ है! जो निर्माण कर सकता है वह उपचार भी कर सकता है!

अगर आंतरिक उपचारक तत्व सशक्त है, तो वह सभी प्रकार की बीमारियों से हमारी रक्षा करता है और बीमारी आने पर उसे जल्दी से ठीक भी करता है।

जटिल समस्याएं

कुछ शोधकर्ताओं के मतानुसार अगर इसके मुल कारणों को दूर न किया गया तो कुछ अन्य जटिल समस्याओं के निर्माण होने का खतरा बढ़ जाता है, जैसे-

  • मवाद (पस) बनना।
  • थैली का सड़ना (गैंगरीन)।
  • थैली का फूटना (परफोटेशन)।
  • पेनक्रियाज में सूजन।
  • पीलिया।
  • पित्त की थैली का कैंसर।

ये भी पढ़े….टिटनस के लक्षण कारण और उपचार

क्या ऑपरेशन करना सुरक्षित है ?

गॉल ब्लैडर में से पथरी निकालने के लिए सामान्यत: आपने ऑप्रेशन के बारे में ही सुना होगा।

इस ऑप्रेशन के दौरान रोगी के शरीर से यह गॉल ब्लैडर निकाल बाहर कर दिया जाता है।

उस समय रोगी को आराम तो मिल जाता है लेकिन उसके भविष्य के लिए खड़े हो जाते हैं कुछ संकट।

उसकी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और थोड़े भी वसा युक्त खाद्य पदार्थ वह ग्रहण नहीं कर सकता।

इसलिए हो सके वहा तक बिना सर्जरी के और सुरक्षित तरीको से इसकी जड़ो को नष्ट करना चाहिए।

ये भी पढ़े….डेंगू के इलाज हिंदी में

क्या बिना ऑपरेशन किए पित्ताशय की पथरी और सूजन ठीक हो सकती है ?

पित्त की थैली में पथरी होने के बारे में यही कहा जाता है कि बिना ऑपरेशन के इसे निकालना मुश्किल है।

ऐसे में यदि आपको गॉल ब्लेडर स्टोन की शिकायत है तो जाहिर है आपने भी ऑपरेशन का विचार बनाया होगा।

लेकिन कुछ ऐसे भी उपाय है जो रोग के मूल कारणों को नष्ट करके बिना ऑपरेशन के ही इस पथरी की समस्या से मुक्ति दिला सकते है।

पथरी के मूल कारणों को नष्ट किया जाए तो उसके भविष्य में होने की संभावनाएं भी कम हो जाती है।

पित्ताशय की पथरी और सूजन बिना ऑपरेशन के ही ठीक होने की संभावनाएं होती है !

पित्ताशय की पथरी का उपचार “ऑपरेशन से या बिना ऑपरेशन के करना है” इसका आधार रोग के प्रकार और अवस्था पर करता है। उपचार का निर्णय लेते वक्त रोगी की अवस्था को भी ध्यान में रखा जाता है। इसका निर्णय किसी अच्छे विशेषज्ञ के मार्गदर्शन से ही लेना चाहिए।

ये भी पढ़े….मलेरिया – Malaria

ऑपरेशन की पद्धतियाँ

ऑपरेशन दो पद्धतियों द्वारा किया जाता है।

  1. पहली पारंपरिक विधि जिसमें चीरा लगाकर ऑपरेशन किया जाता है।
  2. दूसरी विधि जो कि आजकल सर्वाधिक प्रचलित है यानि लेप्रोस्कोपिक कोलीसिसटेक्टमी (लेप कोली) यानी दूरबीन पद्धति द्वारा ऑपरेशन।

ये भी पढ़े……

loading...

About the author

Ram Kumar

1 Comment

Leave a Comment