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ह्रदय रोगी के लिए लाभदायक है पर्यकासन PARYAKASAN

पर्यकासन में जांघ से लेकर सिर तक की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा होता है। और सारे अंग स्वस्थ बने रहते है। ह्रदय रोंगो में यह आसन विशेष लाभकारी है। यह सुप्त वज्रासन जैसा ही है। यह आसन करने पर तीन से चार आसन का एक साथ फायदा होता है। जिसमे वज्रासन, सुप्त वज्रासन और मत्स्यासन के सभी लाभ एक साथ मिलते है।

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पर्यकासन PARYAKASAN करने की विधि

इस आसन को दो विधि से किया जा सकता है:-

पहली विधि

  • वज्रासन में बैठकर हाथो का सहारा लेकर धीरे-धीरे इस प्रकार लेट जाये कि केवल सिर जमीन को छूता हुआ हो और धड़ वाला हिस्सा जमीन से थोड़ा ऊपर रहे।
  • ये प्रक्रिया इस तरह किया जाना चाहिए की शरीर को कोई झटका न लगे।
  • लेटने के बाद दोनों घुटनो को मिला ले।
  • हांथो को पीछे, सिर के पास ले जाकर इंटरलॉक कर ले।
  • आप चाहे तो हांथो को जांघ या नाभि पर भी रख सकते है।
  • इसी अवस्था में आराम से लगभग एक से तीन मिनट्स तक किसी भी तरह से रुके।
  • अब धीमी, लम्बी और गहरी साँस के साथ हांथो को खोले और धीरे-धीरे पुनः पहले वज्रासन में आ जाये और उसके बाद पैरो को सीधा कर शवासन में आ जाये और आराम करे।

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दूसरी विधि

  • सबसे पहले बैठ जाये और दोनों पैर सामने फैला ले।
  • अब साँस भरकर दाएं पैर को थोड़ा मोड़ते हुए और दाहिनी ओर ले जाये।
  • दाएं घुटने पर दाहिनी कोहनी रखकर लेट जाये और दाएं हाँथ को सिर के नीचे तकिये की तरह रख ले।
  • बायां पैर बिल्कुल सीध में रहे और बायां हाथ बाई जांघ पर हो।
  • इस अवस्था में लगभग एक मिनट्स तक सहज सांस के साथ रहे।
  • दोबारा यही प्रक्रिया बाएं पैर को मोड़कर दोहराये।

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पर्यकासन PARYAKASAN से होने वाले लाभ

  • इस आसन से सांस सम्बन्धी रोग दूर करने में मदद मिलती है। क्योकि यह आसन पीठ में खिंचाव के कारण फेफड़ो को शसक्त कर देता है। जिसमे फेफड़ो को अधिक ऑक्सीजन मिलने के कारण स्वस्थ रहते है।
  • गर्दन के आसपास के भागो में खिचाव के कारण थाइरोइड की समस्या में राहत मिलती है।
  • वज्रासन में होने के कारण पाचनतंत्र की ओर रक्त संचार बढ़ता है और वह बेहतर ढंग से काम करता है।
  • प्रजनन अंगो और मूत्राशय के रोंगो में राहत मिलती है।
  • जांघ, कमर और पेट में खिंचाव से ये अंग क्रियाशील होते है। रीढ़ की हड्डी सशक्त होती है।
  • कमर और नितम्बो की चर्बी कम करने में मददगार है।
  • बवासीर, हयड्रोसेल, सुस्ती, हर्निया और शुक्राणु कम बनने आदि की समस्या में भी लाभप्रद है।
  • इस आसन से गैस और बदहजमी से छुटकारा मिलता है।

नोट:- गर्भवती महिलाये इस आसन को करने में सावधानी बरतनी चाहिए।

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