Ayurvedic Herbs

Kewda ke fayde | केवड़ा के फायदे

केवड़ा Kewda

इसे दूसरे भाषाओं में धूतिपुष्पिका, गन्धपुष्प, इंदूकलिका, नृपप्रिया, केंदा, केउर, केवरी, कदगई, गोजंगी, केवरा, Kewda  आदि नामो से जाना जाता है। यह भारतवर्ष के वनो में पाया जाने वाला औषधि है। केवड़े का फूल या भुट्टा पूरे भारतवर्ष में विख्यात है। इसकी मनमोहिनी सुगनध प्राचीन काल से ही भारत में काफी लोकप्रिय रहा है। केवड़ा का पौधा गन्ने की तरह लम्बा रहता है और इसके लम्बे-लम्बे पत्ते होते है। इनके पत्तो के किनारे पर कांटे रहते है। इसका भुट्टा 15 से 20 सेमी तक लम्बा रहता है।

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केवड़ा के आयुर्वेदिक गुण

  • Kewda  पत्ते तीक्ष्ण, कटु और सुगंधमय होता है। ये विषनाशक, कामोद्दीपक और पथरी में बहुत लाभदायक रहते है।
  • इसके फूल कड़वा, तीक्ष्ण और शरीर सौंदर्य को बढ़ाने वाले होते है।
  • केवरी के केशर फेफड़े के ऊपर की झिल्ली के प्रदाह में उपयोगी होती है।
  • इसका फल वात, कफ और मूत्राशय की तकलीफो में फायदा होता है।

केवड़ा के फायदे

  • गाय के दूध में 6 ग्राम Kewda की जड़ को घिसकर शक्कर मिलाकर सुबह शाम पिलाने से रक्तप्रदर समाप्त होता है।
  • स्त्री को गर्भ रहने के दुसरे महीने से चौथे महीने तक इस औषधि का सेवन करने से गर्भपात नहीं होता है।
  • इसके भुट्टे से निकाला हुआ तेल और इत्र काफी उत्तेजक होता है। ये सिरदर्द और सन्धिवात में लाभदायक होता है।
  • नृपप्रिया का उपयोग इत्र, पान मसाला, गुलदस्ते, तम्बाखू, केश तेल, अगरबत्ती, साबुन में सुगंध के रुप में किया जाता है।
  • इंदूकलिका के जल का उपयोग मिठाई, सीरप और शीतल पेय पदार्थो में सुगंध लाने के लिए करते है।
  • केवरा की जड़ से खाज खुजली और त्वचा रोगों में लगाने से लाभ होता है।
  • धूतिपुष्पिका तेल का उपयोग औषधि के रूप में गठियावत में किया जाता है।
  • केवड़े के जल का प्रयोग केशों के दुर्गंध दूर करने के लिए किया जाता है।
  • Kewda जल से गणेशजी का अभिषेक किया जाता है।
  • गुलाब की जल की तरह केवडा जल भी त्वचा को टोन करता है।
  • यह त्वचा की गहराई से सफाई करता है।
  • त्वचा के छिद्रों को बंद करता है।
  • इसके एंटी ऑक्सीडेंट कैंसर, बुढापे आदि से लड़ने में मदद करते है।
  • इसकी पत्तियों का उपयोग झोपडियों को ढ़कने, चटाई तैयार करने, टोप, टोकनियाँ और कागज निर्माण करने के लिए किया जाता हैं।
  • Kewda से प्राप्त लंबी जडों के रेशो का उपयोग रस्सी बनाने में और टोकनियाँ बनाने में किया जाता है।
  • घर के मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं पर चंदन, कपूर, चंपा, गुलाब, केवड़ा, केसर और चमेली का इत्र चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।
  • अगर किसी के कान में दर्द हो रहा हो तो केवडे के इत्र की दो बुन्दों को कान में डालने से कान दर्द से आराम मिलता है।

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