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योगासन के प्रकार

योगासन Yogasana

आजकल मनुष्य अपने व्यस्त जीवन में अपना ध्यान नहीं रख पाता है इसलिए वो शारीरिक और मानसिक बीमारियों से परेशान हो जाते है जिससे अपना सुख,आनंद सब खो देते है ऐसे व्यक्ति क्रोध, घ्रिडा, स्वार्थ, चिड़चिड़ापन आदि से परेशान हो जाता है ऐसे में इन सब परेशानियों को दूर करने का सबसे अच्छा माध्यम है योग। योग मनुष्य को स्वस्थ, बुद्धि को तेज और दृढ बनाता है साथ ही व्यक्ति को वो सब सुख मिल जाता है जिसके लिए वो परेशान रहता है योग करने से पहले आइये जानते है योग कितने प्रकार के होते है और कैसे करे:-

 

योगासन के प्रकार और विधि yogasana ke parkar aur vidhi

सूर्यनमस्कार:- ये सब योगासनों yogasana में से सर्वश्रेष्ठ योगासन है, ये अकेला ऐसा योग है, जो सम्पूर्ण लाभ प्रदान करता है। सूर्यनमस्कार योगासन को बाल, युवा, स्त्री, और वृद्ध सब लोग कर सकते है ये शरीर को स्वस्थ रख कर निरोगी और बल प्रदान करता है।

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-सर्वप्रथम सूर्यनमस्कार करने के लिए दोनों हाथ जोड़ कर सीधे खड़े होना चाहिए।

-श्वास लेते हुए दोनों हाथ ऊपर की तरफ ले जाइए दोनों हाथ कान से सटे और तना होना चाहिए उसके बाद गर्दन को पीछे की तरफ झुकना चाहिए।

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-तीसरे अवस्था में श्वास को छोड़ते हुए आगे की तरफ अपने शरीर को झुकाना है ,और याद रहे दोनों हाथ कान से सटे होना चाहिए और अपने आस पास के जमीन को छुए और माथा को घुटने से सटा होना चाहिए थोड़ी देर इसी अवस्था में रहे।

-चौथी अवस्था में श्वास भरते हुए बाएं पैर को पीछे ले जाना होता है और छाती को आगे की और खींच कर तानना होता है, जिससे शरीर संतुलन का संतुलन बना रहे थोड़ी देर इसी अवस्था में रहे।

-श्वास को धीरे-धीरे छोड़ते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएँ और ये सुनिश्चित कर लेना चाहिए की पैर की दोनों एड़िया मिली है कि नहीं!अब अपने शरीर को पीछे की और खिचाव दे कर एड़ियों को मिलाने का प्रयास करे फिर नितम्बो को जितना हो सके उतना ऊपर उठाओ और साथ में गर्दन को नीचे की तरफ जितना हो सके उतना झुकाओ।

-अब श्वास लेते हुए अपने शरीर को पृथ्वी के सामानांतर लेटा कर दंडवत प्रणाम करे घुटने, माथा और ठुडी पृथ्वी पर लगाकर थोड़ा सा कमर का भाग ऊपर उठाए अब अपने श्वसन क्रिया को सामान्य कीजिये अब आगे श्वास भरते हुए छाती को आगे की ओर खिचाव दे और सीधी हाथ करते हुए अपनी गर्दन के पीछे की ओर ले जाये इस दौरान घुटने जमीन से सटे, और पैर के दोनों पंजे खड़े होने चाहिए।

-अब श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए दोनों पैर को पीछे ले जाये अब पर्वत का निर्माण करते हुए थोड़े देर इसी अवस्था में रहे श्वास अंदर लेते हुए बायां पैर दोनों हाथो के बीच ले आये और छाती को आगे खींच कर गर्दन को पीछे के तरफ ले जाये श्वास को छोड़ते हुए हाथ से पैर को छुए और ये सुनिश्चित करना होता है कि माथा घुटनो से लगा है।

-अगली अवस्था में श्वास को अंदर लेते हुए दोनों हाथो को सीधी करके पीछे ले जाना होता है और गर्दन को पीछे के तरफ खिचाव करे।

-अब अंतिम अवस्था में श्वसन क्रिया को सामान्य करके सीधे खड़े हो कर दोनों हाथ जोड़कर सूर्यदेव की प्रार्थना करे।

पद्मासन:-पद्म का अर्थ कमल होता है (पद्म+आसन) इस yogasana में शरीर ध्यान के अवस्था में बैठता है इस आसन से व्यक्ति निरोगी रहता है।

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पद्मासन करने के लिए खुला वातावरण और शांति होनी चाहिए इस आसन को करने के लिए अपने दोनों पैरों को मोड़ कर बैठे और अपने पैर का एक पंजा दूसरे की पैर की जंघा पर रहे और ध्यान दे की पैर का तलवा आपके पेट की तरफ हो।

-आप अपनी कमर और गर्दन सीधी रखे।

-अब अपने कुहनियो को अपने घुटनो पर रखे और गर्दन सीधी रखे।

-अपनी आखे बंद करके धीरे-धीरे श्वास ले।

वज्रासन:- ये आसन आप आसानी से कर सकते हो इस आसन में शरीर को ज्यादा हिलाना नहीं पड़ता है।

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-इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप घुटनो को मोड़ कर बैठ जाएँ और दोनों एड़ियों को पीछे की तरफ ले जाये और अपनी कमर को सीधी रखे अब अपने हाथो को एड़ियों पर रखे।

वज्रासन में कुछ देर रहने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाये।

स्वस्तिकासन:-इस आसन को करने से पैरो में रक्त परिसंचरण सही से होता है, और पैर सम्बंधित बीमारियां दूर होती है।

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-इस आसन को करने के लिए बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाहिने जंघा और पिंडली (घुटने के नीचे का हिस्सा) और के बीच इस प्रकार स्थापित करें की बाएं पैर का तलवा छिप जाये उसके बाद दाहिने पैर के पंजे और तलवा को बाएं पैर के नीचे से जांघ और पिंडली के मध्य स्थापित करने से स्वस्तिकासन बनायें ध्यान मुद्रा में बैठें तथा रीढ़ सीधी कर श्वास खींचकर यथाशक्ति रोकें।इसी प्रक्रिया को पैर बदलकर भी करें।

गोरक्षासन:-यह आसन हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में काफी सहायक होता है, और मन के उथल-पुथल को समाप्त कर शांति प्रदान करता है। ये आसन मांसपेशियों में रक्तसंचार ठीक करता है।

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-दोनों पैरों की एड़ियां तथा पंजे आपस में मिलाकर सामने रखिये।
-अब सीवनी नाड़ी (गुदा एवं मूत्रेन्द्रिय के मध्य) को एडियों पर रखते हुए उस पर बैठे दोनों घुटने भूमि पर टिके हुए हों।
-हाथों को ज्ञान मुद्रा की स्थिति में घुटनों पर रखें।

योगमुद्रासन:-ये आसन करने से हमारा शरीर स्वस्थ होने के साथ मन में शांति और एकाग्रता लाती है और हमारे चहरे की सुंदरता को निखरता है।

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-बाएं पैर को उठाकर दायीं जांघ पर रखिये की बाएं पैर की एडी नाभि के नीचे आ जाये।
-दायें पैर को उठाकर इस तरह रखिये की बाएं पैर की एडी के साथ नाभि के नीचे मिल जाए।
-दोनों हाथ पीछे ले जाकर बाएं हाथ की कलाई को दाहिने हाथ से पकडें. फिर श्वास छोड़ते हुए।
-सामने की ओ़र झुकते हुए नाक को जमीन से लगाने का प्रयास करें. हाथ बदलकर क्रिया करें।
-फिर से पैर बदलकर यही क्रिया कीजिये

भुजंगासन:-इस आसन को प्रतिदिन अभ्यास करने से कमर सम्बंधित परिशानिया दूर होती है, ये आसन पीठ, कमर के दर्द और मेरुदंड में लाभकारी है।

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-इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल होकर दोनों पैर पीछे के तरफ ले जाये और ध्यान रहे की एड़ियां सटी हो और जांघ जमीन से सटा हो।
-अब दोनों हाथ के पंजो को जमीन पर रखे।
-गर्दन को पीछे की तरफ ले जाकर आसमान के तरफ देखे यही क्रिया दोहराये।

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योगासन के लाभ और नियम

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