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अशोक Ashoka(Jonecia Asoca, Saraca Indica) के आयुर्वेदिक गुण और फायदे

अशोक वृक्ष

ये अन्य भाषाओं में मधुपुष्पक, अशापालो, आशापालम आदि नामो से जाना जाता है। यह भारत देश के सभी जगहों पर पाया जाता है। इसका वृक्ष आम के पेड़ जैसा होता है और इसके पत्ते रामफल के समान और फूल नारंगी रंग के होते है।

अशोक के आयुर्वेदिक गुण

ये मधुर, शीतल हड्डी को जोड़ने वाला, सुगन्धित, कृमिनाशक, कसैला, गरम, कडुवा, देह की कांति को बढ़ाने वाला, मलरोधक, स्त्रियों का शोक दूर करने वाला, पित्त, दाह, श्रम, गुल्म, पेट के रोग, भूल, विषनाशक, बवासीर, तृषा, सूजन, अपच और रुधिर रोग में गुणकारी होती है।

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अशोक के विभिन्न रोगो में फायदे

  • सफ़ेद जीरा, दाल चीनी, इलाइची और अशोक की छाल को पीसकर कर काढ़ा बना ले इसको दिन में तीन बार पीने से रक्तप्रदर में बहुत लाभ मिलता है।
  • अशापालो की छाल और मिश्री समान मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना ले इस चूर्ण को दिन में तीन बार लेने से श्वेतप्रदर में काफी आराम मिलता है।
  • 100 ग्राम अशोका पाउडर को चार कप पानी उबाले और इसे तब तक उबाले जब तक ये दो कप न रह जाये फिर इसको ठंडा करके इसमें आधा कप सरसो का तेल डालकर अच्छी तरह मिला ले इसे चेहरे पर लगाएं जब तक मुहांसे ठीक न हो जाये।
  • बवासीर में अशोक की छाल बहुत ही लाभकारी होता है इसमें आपको 100 ग्राम अशोक की छाल, 400 मिली. पानी और 50 मिली. दूध तीनो को मिलाकर इतना उबालो कि ये मिश्रण 100 मिली. बचे फिर इस काढ़े को दिन में दो से तीन बार पीने से बवासीर धीरे-धीरे ठीक होने लगता है।
  • वर्तमान समय अशोक औषधि के टॉनिक आते है जिसका नाम अशोकारिष्ट है ये बहुत सी कम्पनिया द्वारा बनाया जाता है इस टॉनिक का प्रयोग करने से माहवारी के दौरान होने वाले भारी ब्लीडिंग को कम करता है और उस टाइम होने वाले दर्द और बेचैनी को भी कम करती है।
  • अशोक के फूल 2-3 ग्राम की मात्रा में लेकर रोजाना दही के साथ सेवन करने से गर्भ स्थापित होता है।
  • अशोक की छाल, बबूल की छाल, गूलर की छाल, माजूफल और फिटकरी समान भाग में पीसकर 40 ग्राम चूर्ण को 320 मिलीलीटर पानी में उबालें, 80 मिलीलीटर शेष बचे तो उतार लें, इसे छानकर पिचकारी के माध्यम से रोज रात को योनि में डालें, फिर 1 घंटे के पश्चात मूत्रत्याग करें। कुछ ही दिनों के प्रयोग से योनि तंग (टाईट) हो जायेगी।
  • श्वास के रोग में अशोक के बीज बहुत ही लाभकारी होता है। अशोक के बीजों के चूर्ण की मात्रा एक चावल भर, 6-7 बार पान के बीड़े में रखकर खिलाने से श्वास रोग में लाभ होता है।
  • अशोक के 1-2 ग्राम बीज को पानी में पीसकर नियमित रूप से 2 चम्मच की मात्रा में पिलाने से मूत्र न आने की शिकायत और पथरी के कष्ट में आराम मिलता है।

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