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दमा रोग अस्थमा

Dama rog Asthma दमा रोग अस्थमा

जब किसी व्यक्ति की श्वास नलियो में संक्रमण हो जाता है और सांस लेने में परेशानी होने लगती है इसी को दमा अस्थमा कहते है। दमा रोग खासकर दिवाली या ऐसे त्योहारों में होता है, जहा हमारे पर्यावरण में पटाखों की वजह से वायु प्रदूषण बढ़ जाता है इससे व्यक्ति लगातार खांसते रहता है। इन विषैली गैसों के कारण श्वास नलियों में संक्रमण उत्पन्न हो जाता है। श्वास नली की मांसपेशिया सिकुड़ जाती है, इस कारण फेफड़ो से वायु की निकलने या प्रवेश करने में तकलीफे बढ़ जाती है। ये बीमारी आनुवंशिक भी हो सकती है। इस बीमारी को कभी पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन ये नियंत्रण में रखा जा सकता है।

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दमा होने के कारण

दमा या अस्थमा रोग होने के प्रमुख कारण है वायु प्रदूषण। इसका मतलब जैसे की हम किसी ऐसी जगह होते है, जहा खुली हवा न आ जा सके कोई ऐसा काम हो रहा हो की वहां धुल के कण उत्पन्न हो रहो हो, और धुंआ निकल रहा हो आप को सांस लेने में परेशानी हो रही हो और धुंआ और धूल भरी जगह पर आपका लगातार बना रहना भी प्रमुख कारण है। अक्सर ठण्ड के मौसम में दमा रोग भयंकर रूप ले ले लेता है।

दमा या अस्थमा रोग के लक्षण

दमा का रोग दो प्रकार से होता है एक तो ये धीरे-धीर शुरू होता है दूसरा अचानक ही शुरू हो जाता है। अचानक शुरू होने वाला दमा खांसी, छींक, सर्दी, सांस लेने में तकलीफ होना, घबराहट होना, बेचैनी महसूस होना, तेजी-तेजी से सांस लेना, साँसों का छोटी होना, सांस लेते समय थकावट महसूस होना, सांस लेने के समय पसीने आना ये आम लक्षण है, धीरे-धीरे शुरू होने वाला दमा खांसी से शुरू होता है और ये धीरे-धीरे उबरता है और सांस नली को संक्रमित करता है।

दमा रोग के घरेलु उपचार

  • दमा रोगी को ताजे फल हरे पत्तेदार साग-सब्जी, अंकुरित चने, क्षरीय खाद्य पदार्थो का भरपूर सेवन करना चाहिए।
    चावल, दही, शक्कर, तले हुए गरिस्ट खाद्य पदार्थ नहीं सेवन करना चाहिए।
  • खाने में ठंडी चीजे नहीं लेने चाहिए, अधिक कफ या बलगम बनाने वाली चीजे नहीं सेवन करनी चाहिए।
  • जिस व्यक्ति को दमा है उसको भरपेट खाना नहीं खाना चाहिए हल्का फुल्का खाना चाहिए जिसमे पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा मिल सके और पाचनक्रिया ठीक रहे।
  • दमा रोगी को ऐसी जगहों पर जाने से बचना चाहिए जहा धुल भरा वातावरण हो या आपको किसी चीज से एलर्जी हो जैसे की धुंआ, धूल आदि।
  • दमा रोगी को धुप में ज्यादा नहीं बैठना चाहिए या धुप के बगल वाली जगह छाव में बैठना चाहिए।
  • व्यक्ति को धूम्रपान करने से बचना चाहिए क्युकी उसकी धुंआ से व्यक्ति को एलर्जी हो सकती है खांसी हो सकती है और दमा का दौरा पड़ सकता है।
  • अगर व्यक्ति को दमा का दौरा पड़ा है तो उसको पीने के लिए हल्का गर्म पानी हर दो घंटे पर देना चाहिए और जब तक रोगी को आराम न मिले उसको भोजन से दूर रखना चाहिए आराम होने पर हल्का भोजन देना चाहिए।
  • इसमें लहसुन की कली बहुत लाभदायक होता है पंद्रह कली लहसुन लेकर एक गिलास दूध में उबाले जब दूध हल्का गर्म रह जाये पीने लायक तो इसे छान ले और छाने हुए दूध को पी ले ये दिन में एक बार करे।
  • छुहारा से भी अस्थमा रोग में बहुत फायदा मिलता है पांच छुहारा लेकर एक गिलास दूध में इसे उबाले और जब पीने लायक गर्म रहे तो गुठली निकाल कर छुहारा खाकर ऊपर से दूध पी ले ये क्रिया दिन में एक बार करनी चाहिए।
  • अंगूर इस रोग के लिए काफी लाभदायक है इसका रस भी दमा रोगी के लिए भी उपयोगी है।
  • एक चम्मच हल्दी का चूर्ण हल्का गर्म दूध में डाल कर लेने से काफी लाभ मिलता है।
  • अंजीर दमा के रोगी के लिए काफी लाभदायक होता है।
  • सीताफल की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से काफी लाभ मिलता है।
  • पालक, चौलाई, सोयाबीन, गाजर, आमला, पनीर खाना चाहिए।
  • करेले की सब्जी, करेले का जूस पीना चाहिए ये भी दमा रोग में काफी लाभदायक है।
  • दमा रोगी को शांत वातावरण और अपने मन को शांत रखना चाहिए।

नोट:- व्यक्ति को अगर दमा या अस्थमा ज्यादा परेशानी हो रही है तो अपने चिकिसक से सलाह ले।

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