आरार (हाऊबेर) के गुण

1
0
Aarar-(hauber)
image source google

यह छः या सात फुट ऊँचा वृक्ष होता है। इसके पिण्ड की गोलाई डेढ़ फीट की होती है। इसकी छाल कुछ सफेद भूरे रंग की होती है। इसकी छोटी शाखा सुगन्धयुक्त होता है। इसके पत्ते कुछ भूरे रंग के होते है। इसमें छोटे-छोटे फल लगते है। उनमे बहुथा तीन-तीन बीज निकलते है। जब इसके फल पुरे बड़े हो जाते है , और नहीं पकते है , तब तक उनमे बहुत तेल रहता है। जब वे पक जाते है तो उस तेल का राल जैसे पदार्थ बन जाता है , जो बहुत हलके पीले रंग का होता है और उसमे फूल जैसी बहुत तीव्र गंध होती है।

  • आरार (हाऊबेर) के अन्य नाम
  • आरार (हाऊबेर) के गुण

(और भीं पढ़ें – अपराजिता के लाभ और हानि )

आरार (हाऊबेर) के अन्य नाम

हिंदी – हाऊबेर , आरार , होबेर
संस्कृत – पलीहहंत्री , मत्स्यगन्धा , विषघनी , आश्रृत्य फल
मराठी – होश
पंजाबी – पत्थरी
दक्षिणी – अमल
अरबी – अमल
उर्दू – अबहल
फारसी – ओरस

Aarar-(hauber)
image source google

आरार (हाऊबेर) के गुण

  • यह वनस्पति चरपरी , कड़वी , भारी , गरम , दीपन , क्षुधावर्द्धक , पथरी , यकृत और पेट की पीड़ा , जलोदर , अर्बुद , बच्चों की खांसी , वायुनलियों के प्रदाह , कब्जियत तथा योनिरोगों में लाभकारी है।
  • हाऊबेर उत्तम उत्तेजक और मूत्रक होता है। इसको लेने से मूत्र की तादाद काफी मात्रा में बढ़ती है। यकृतोदर , जलोदर , ह्रदयोदर इत्यादि में दस वनस्पति को दूसरी उपयोगी औषधियों के साथ मिलाकर देते है। पुराने सुजाक और शवेतप्रदर में भी इसका उपयोग होता है।
  • यूनानी – यह पौधा खराब गंध वाला , खट्टा , मीठा और तीखे स्वाद वाला होता है। यह आँतो के लिए हल्का और संकोचक होता है। यह ज्वरनिवारक और पौष्टिक है। इसकी लकड़ी , कड़वी , विरेचक , कृमिनाशक , रक्तस्राव को रोकने वाली , घाव को भरने वाली , मूत्रल और ऋतुस्राव नियामक है। यह कामोददीपक , पौष्टिक और रक्तवर्द्धक है। सीने की तकलीफो में वायु-नलियों के प्रदाह में , आधाशीशी में , यकृत की बीमारियों में बवासीर में तथा अधिक परिश्रम उत्पन्न हुई तकलीफो में यह लाभकारी है। इसके फल का तेल ऋतुस्राव-नियामक , गर्मस्रावक और पौष्टिक है। यह कृमिनाशक तथा क्रनशूल , दंतशूल और बावसी में लाभदायक है। यह तेल भिन्न-भिन्न प्रकार के जलोदर रोगी के उपयोग में लिया जाता है। इसे सवतंत्र रूप से या दूसरी औषधियों के साथ भी काम में लेते है। पुरातन प्रमेह सुजाक और श्वेतप्रदर में भी इसकी उपयोगिता मानी जाती है।

और भीं पढ़ें …

Previous articleअफसन्तीन के गुण और उपयोग
Next articleआम्बोली के गुण

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here