आम्बोली के गुण

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Amboli
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इसकी ऊँचाई दो हाथ तक रहती है। इसके पत्ते चार के झँवरो में होते है। कुछ जोड़े , बर्छी के आकार वाले , तीखी नोक वाले और चमकीले रहते है। इसमें नसों की आठ जोड़ होती है। इससे बहुत से फूल लगते है। ये सब बर्छी के आकार के और फलियाँ बहुत तीखी रहती है। इसका पुष्प आभ्यंतर आवरण , नारंगी व पीले रंग का होता है। इसके फूल दक्षिण में छोटी बांधने के काम में आते है।

  • आम्बोली के अन्य नाम
  • आम्बोली के गुण

(और भीं पढ़ें – अपराजिता के लाभ और हानि )

आम्बोली के अन्य नाम

हिंदी – आम्बोली , प्रियदर्श
कन्नर – अवांलिगो
मद्रासी – कनम अंबर
मलायलम – मंकरुणि
तमिल – पोरकुरिंज , सगसारी , टिड़ियम
तेलगू – कनकब्रम
प्राप्तिस्थान – पश्चिमी , प्रायदिवप , सीलोन , उत्तरी भारत , दंगल और मलाया

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आम्बोली के गुण

वनस्पति कामोददीपक है। आम्बोली का प्रधान उपयोग कफ को नष्ट करने के लिये होता है। औषधि के रूप में इसके पत्तों का रस बीस से तीस बूंद तक और इसकी जड़ एक से दो तोला तक दी जाती है। छोटे बच्चों को होने वाली खांसी , बोंकाइटिस में इसको पान का रस शहद और पीपर के साथ देने से बड़ा लाभ होता है। इसी प्रकार इसकी जड़ को दूध के साथ आधे तोले से एक तोले तक उबालकर शक्कर मिलाकर देने से स्त्रियों के श्वेतप्रदर एयर रक्तप्रदर में लाभ होता है

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