अगस्त के गुण और उपयोग

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यह 20 से 30 फ़ीट ऊँचा सघन डालियों से युक्त चिकने-भूरे तनेवाला पेड़ होता है। पत्ते इमली से कुछ बड़े होते है , कुछ लाल और सफेद तिरछे होते है। फलिया 10 से 12 इंच लम्बी होती है। कई जगह भारत में इनके पत्तों का शाक भी खाया जाता है। यह समस्त भारतवर्ष के तराई वनों में पायी जाती है। इसके पेड़ कुछ लोग बागों में भी लगाते हैं।

  • अगस्त के अन्य नाम
  • अगस्त के गुण
  • अगस्त के उपयोग
  • अगस्त के दैवीगुण

(और भीं पढ़ें – अफसन्तीन के गुण उपयोग )

अगस्त के नाम

हिंदी – अगस्त
संस्कृत – अगस्त्य
गुजराती – अगस्धियो
बंगला – बक
मराठी – अगस्ता
कन्नड़ – चोगची
तमिल – अर्गतो
तेलगु – अविसी

अगस्त के गुण

आयुर्वेद – शीतल , रुखा , वायवीय , शीतवीर्य एवं कड़वा।
यूनानी – दूसरे दर्जे का ठंडा , रुखा।

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अगस्त के उपयोग

मृगी या उन्माद में नाक में पत्तों का रस 3 बूंद टपकाने से सिर का नजला निकलता है। इसके फूलो एवं काली मिर्च को गोमूत्र के साथ पीने से मृगी या उन्माद नष्ट होता है। चोट पर इसके पत्ते की पुल्टिस बाँधने से लाभ होता है। फूलों का रस दृष्टि के लिए लाभदायक है। चल का रस योनि में रखने पर श्वेत प्रदर दूर होता है। अधकपाली दर्द में दूसरी तरफ के नाक में अगस्त के फूलों का रस डालें। फूलों का चूर्ण जुकाम को दूर करता है छाल या पत्ते को धतूरे की जड़ के साथ पीसकर बाँधने या लेपने से सूजन कम होती है। लाल अगस्त के फूल का रस नाक में लेने पर मलेरिया या चौथा ज्वर आराम होता है। इसके पत्ते एवं फूलों का शाक नेत्र के लिये बहुत लाभदायी है।

अगस्त के दैवीगुण

  • गाय का गोबर 1 भाग , अगस्त के फूलों का चूर्ण 1 भाग , आक के पत्तों की राख 1/4 भाग , घी 1 भाग – इनका नस्य लेने से उन्माद , मृगी , भूत बाधा और सिरदर्द दूर करता है।
  • अगस्त की जड़ , छाल , पत्तें , फूल – की धुनी धतूरे की जड़ के साथ धूनी देने पर भूत-प्रेत बाधा , उन्माद दूर होता है। सफेद सरसो , लहसुन , तिल एवं हींग भी मिलायें।

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