कॉफ़ी पीने के फायदे और नुकसान

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कॉफी चाय से कम हानि पहुँचाती है लेकिन लगातार अधिक मात्रा में पीने पर पेट का कैंसर , सन्तानोत्पत्ति शक्ति को कमजोर करती है।

शरीर में दर्द , बेचैनी बनी रहती है। बवासीर वाले रोगी कॉफी नहीं पिएँ।

कॉफी अधिक मात्रा में पीना हानिकारक है।

इससे निमन बीमारियाँ हो सकती है –
हृदय रोग , ओवरी का कैंसर , पाचनतंत्र में गड़बड़ी , मूत्रनलिका में कैंसर , गर्भधारक में रुकावट , अल्सर , माइग्रेन।

कॉफी में कैफीन के अलावा कुछ फिनोलिक कम्पाउंड भी रिसर्च के दौरान पाए गए है।

इनमे टेनिन्स एक महत्वपूर्ण एंटी ऑक्सीडेन्ट है जो शरीर को विघटनकारी क्रियाएँ रोकता है।

एंटी ऑक्सीडेंट से फ्री – रेडिकल्स को हटाने में मदद मिलती है।

इससे कैंसर जैसी बीमारी पर कॉफी हद तक नियंत्रण किया जा सकता है।

कॉफी में करीब तीन सौ प्रकार के अन्य तत्व होते है जिनमे एक नियासीन है , जो की एक को – एंजाइम न्यूट्रियेट है।

कैफीन स्फूर्तिदायक तो है , लेकिन तीन कप से अधिक कॉफी , धीमा जहर का काम करती है।

इस बात को ध्यान रखकर सिर्फ दो कप कॉफ़ी ही पिये।

कॉफ़ी पीना दर्द में है फायदेमंद 

  1. कही भी , कैसा भी दर्द हो , कॉफ़ी पिने से दर्द कम होता है ।
  2. कॉफ़ी में कैफीन तत्त्व होता है जो मास्तिष्क के अनुभव केंद्र जिसे सेंसरी कार्टेक्स ( Sensory Cortax ) कहते है ,को प्रभावित कर उत्तेजना लाता है। इससे दर्द कम होता है।
  3. कॉफी पेशाब अधिक लाती है। कॉफी पीने से हृदय व सांस की नलियाँ फैलती है।
  4. यदि तेज खाँसी , दमा का दौरा पड़ा हो तो बिना दूध और चीनी की गर्म कॉफी पिये।
  5. जो चिकिस्तक भली प्रकार विचार कर रोगी को सही और सामान्य भोजन बताने में असफल रहता है उसकी चिकित्सा में ऐसी बाधाएँ होती है जिनको दूर किये बिना रोगी को स्वस्थ नहीं किया जा सकता।

पार्किसन्स डिजीज

  1. इस बीमारी में कमजोरी , माँसपेशियों में कम्पन्न , हाथ पैर आपने आप हिलते रहते है।
  2. नित्य केवल दो बार सुबह – शाम कॉफी पीने से इस बीमारी में लाभ हो सकता है।
  3. दो बार से अधिक नहीं पिए।

स्फूर्तिदायक और पाचक

  1. कॉफी पीने से मानसिक और शारीरिक थकान एवं भोजन के बाद पेट में होने वाली गड़बड़ियाँ दूर होती है।
  2. भोजन के बाद कॉफी लेने से चित्त प्रसन्न और हल्कापन मालूम होता है की पेट में कुछ खाया ही नहीं है।
  3. खाने – पीने से होने वाला पेटदर्द , अफीम खाने से हुई तेज अपच , भोजन न पचना , पेटदर्द होना , ऐसी स्थिति में तेज कॉफी पिने से स्फूर्ति आती है।
  4. अनिद्रा से उत्पन्न थकान भी भी कॉफी पीने से दूर होती है।
  5. कॉफी पीने से मस्ती प्रतीत होती है।
  6. दमा का दौरा पड़ने पर कॉफी पीने से आराम मिलता है।
  7. यह बिना चीनी और दूध की पिए।
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पेप्टिक अल्सर में कॉफी नहीं पीना चाहिए

  1. कॉफी पीने पर यह पेट के रसो के साथ मिलकर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल अधिक बनती है।
  2. इससे पेप्टिकल अल्सर बन जाता है।
  3. अतः पेप्टिकल अल्सर के रोगियो को कॉफी नहीं पीनी चाहिए।
  4. दिल धड़कना एवं रक्तचाप कॉफी पिने से बढ़ते है।
  5. इसलिए यह नहीं पिए।
  6. देर से प्रसव होने से बेचैनी , उत्तेजित महिलाओ को तेज कॉफी देने से लाभ होता है।

मादक प्रभाव नाशक

  1. तेज कॉफी पीने से मदिरा और अफीम के विष का प्रभाव नष्ट हॉट है।

अफीम ( Opium )

  1. आधा-आधा घण्टे के अन्तर से गरमा – गरम कॉफी दो बार पीने से अफीम का नशा उतर जाता है।
  2. अफीम खाने की आदत छोड़ने वाले यदि कुछ सप्ताह कॉफी पीते रहे तो अफीम खाने की आदत छूट जाती है।

समुद्र यात्रा

  1. समुद्र यात्रा में होने वाली उल्टियो , चककरो से बचने के लिए जहाज में सवार होने के एक घण्टे पूर्व तेज कॉफी पिए।
  2. बोतल में कॉफ़ी साथ रखे और यात्रा के समय भी पिए।
  3. समुंद्री यात्रा की शिकायते कॉफी पिने से नहीं होती।

हर्निया

  1. बार-बार कॉफी पीने और हर्निया वाले स्थान को कॉफी से धोने से हर्निया के गुब्बारे की वायु निकलकर फुलाव ठीक हो जाता है।
  2. मृत्यु के पास पहुँची हुई हर्निया की अवस्था में भी लाभ होता है।
  3. बुढ़ापे में स्मरणशक्ति कॉफी पीने से अच्छी रहती है।
  4. नित्य कॉफी पीने से बुढ़ापे में भूलने की बीमारी ( अल्झीमर्स डिजीज ) होने का खतरा 50 प्रतिशत तक घट जाता है।
  5. गर्भवती महिलाओ को कॉफी का कम-से-कम सेवन करना चाहिए , क्योकि इसके कारण नवजात शिशु का वजन कम हो जाता है।
  6. कॉफी लगातार लम्बे समय तक पीते रहने से स्नायु दुर्बल हो जाते है , स्वास्थ्य खराब रहता है।
  7. अतः इसे औषधि की तरह आवश्यकता पड़ने पर ही पीनी चाहिए।
  8. कॉफी पीने से हानियाँ प्रतीत होने लगे तो होम्योपैथिक औषधि नक्स वोमिका – 30 की चार खुराक नित्य एक सप्ताह तक लेने से इसके हर प्रकार के दुष्प्रभाव दूर हो जाते है।
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