दूधी लाल के गुण और उपयोग

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यह एक वर्षजीवी क्षुद्र और रोयेंदार वनस्पति है। इसका पौधा फुट भर ऊँचा होता है। इसकी डंडिया लाल रंग की रहती है। इसके पत्ते आमने-सामने लगते है। ये इंच भर लम्बे और नोकदार होते है। पत्तों की जोड़ी के बीच में फलों के झूमने लगते है। इसके फल बाजरी के समान होते है। इसकी डाली को तोड़ने से उसमे से सफेद रंग का दूध निकलता है। यह वनस्पति तर जमीनों में बाहर महीनो ही मिलती है , सब जगह नहीं। इसलिए इसको वर्षा ऋतु में इकट्ठी करके सूखा लेना चाहिये।

  • दूधी लाल के अन्य नाम
  • दूधी लाल के गुण
  • दूधी लाल के उपयोग

(और भीं पढ़ें – देवदारु के गुण और उपयोग )

दूधी लाल के अन्य नाम

  • हिंदी – दूधी , लाल दूधी
  • संस्कृत – नागार्जुनी , पयोवर्षा , योगिनी , दुग्धिका , दुग्धफेनी इत्यादि
  • बंगाली – बरकरू
  • गुजराती – नगली दुधेली , राती दुधेली
  • मराठी – नायरी
  • तेलगू – बिंदारी , नानाबला
  • तमील – अमुपच्छे अरिस्सा।

दूधी लाल के गुण

आयुर्वेद के मत से दूधी मधुर , वीर्यवर्धक , रूखी ग्राही , कडवी , वातकारक , गर्भस्थापक , चरपरी , खारी , धातुवर्धक , हृदय को हितकारी , गर्म , परे को बांधनेवाली और प्रमेह , कोढ़ तथा कृमि को दूर करने वाली है।

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दूधी लाल के उपयोग

  • फ़ारसी किताबों में लिखा है की हरी दूधी को छाया में सुखाकर कूट छानकर शक्कर के साथ खाने से कामशक्ति बढ़ती है।
  • इसके पौने दो तोला पत्ते को पीसकर काली मिर्च मिलाकर खाने से सर्प विष में लाभ होता है।
  • जिस जगह कांटा चुभ जाय , उस जगह पर इसका लेप करने से कांटा निकल जाता है।
  • इसके पंचांग का अर्क भभके से खींचकर जलोदर के रोगी को पानी की जगह पिलाया जाय तो बहुत फायदा होता है।
  • इसकी जड़ को 2 माशे पान में रखकर चूसने से जबान का तोतलापन मिट जाता है।
  • गुर्दे और मसाने की पथरी में भीं यह लाभदायक है।
  • मात्रा – दूधी के स्वरस की मात्रा 10 से 20 बूँद तक है और इसके चूर्ण की मात्रा 2 से 5 रत्ती है।

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