Safed daag ke karan aur ilaj | सफ़ेद दाग के कारण और इलाज

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Safed daag ke karan aur ilaj | सफ़ेद दाग के कारण और इलाज

सफ़ेद दाग Safed Daag होना आजकल एक आम समस्या बन गयी है। भारत में लगभग दो प्रतिशत लोग इससे पीड़ित है। इसे अंग्रेजी में ल्यूकोडर्मा(Leucoderma) कहा जाता है। ये त्वचा का एक रोग है जो कि हाथ, पैर, मुंह, होंठ और शरीर के किसी भी अंग में हो सकते है। ये शुरुवाती में छोटे से सफ़ेद रंग के त्वचा पर होते है। धीरे-धीरे ये बढ़ने लगते है और ये बढ़ते ही जाते है। सफ़ेद दाग छोटे बच्चो में भी हो सकता है। लोंगो की अवधारणा है कि ये कुष्ठ रोग होता है लेकिन न ये कुष्ठ रोग है और न ही किसी प्रकार त्वचा कैंसर और कोढ़। आइए जानते है कारण:-

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सफ़ेद दाग होने के कारण

  • आनुवंशिकता।
  • पीलिया या लिवर की समस्या।
  • जलना या चोट लगना।
  • नमक और तेल की ज्यादा मात्रा में सेवन करना।
  • सड़े-गले हुए मांस खाना।
  • भोजन में अनियमितता।
  • मछली और दूध, निम्बू और घी प्रकृति के विरुद्ध सेवन करना
  • आधुनिक चिकित्सको के अनुसार शरीर के त्वचा में मौजूद मेलोनिक नामक रंगीन पदार्थ को बनाने वाली पेशियाँ होती है। जो किसी कारणवश कमजोर पड़ जाती है जिससे त्वचा सफ़ेद पड़ने लगते है।
  • सफ़ेद दाग प्राणघातक नहीं होता है। लेकिन चेहरे या होंठ पर निकलने के बाद सुंदरता को मिटा देता है।
  • पेट में कीड़े की उपस्थिति या पेट में गैस बनना।
  • फंगल संक्रमण होने से भी त्वचा सफ़ेद(white) होने लगती है।
  • स्त्रियों के खराब क्वालिटी की चिपकाने वाली बिंदी का लगातार इस्तेमाल करती हैं। उनको केमिकल ल्यूकोडर्मा की वजह से सफेद दाग होने का खतरा रहता है। खराब क्वॉलिटी की बिंदी में चिपकाने के लिए घटिया केमिकल से बना अधेसिव इस्तमाल किया जाता है जिससे safed daag होता है, इसलिए अच्छी क्वॉलिटी की बिंदी ही लगाएं।

सफ़ेद दाग के इलाज

सरसो का तेल और हल्दी

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दो चम्मच सरसो का तेल और एक चम्मच हल्दी। इन दोनों का लेप बना ले, सुबह और शाम के धूप में इस लेप को सफ़ेद दाग पर लगाकर पंद्रह मिनट्स तक धूप में सेंके। उसके बाद धुल ले। इस प्रयोग को 1 महीना नित्य करने से लाभ मिलता है।

नीम

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नीम के पत्तो को नित्य 10-10 की मात्रा में सुबह खाली पेट सेवन करने से फायदा मिलता है। या नीम के पत्तो का रस निकालकर दो चम्मच और शहद एक चम्मच मिलाकर सुबह लेने से safed daag में बहुत लाभ मिलता है।

सेब के सिरके

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सफ़ेद दाग में सेब के सिरके में थोड़ा सा पानी मिलाकर लगाने से फायदा होता है और एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब को सिरके को पिए इससे रोगी को लाभ होता है।

बावची या बकुची

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अदरक के जूस में बावची या बकुची के बीजो को भिगो कर रखे। तीन दिन तक अदरक के रस को बदलते रहे, तीसरे दिन बावची के बीजो को निकालकर हाथ में रख कर मसल ले। धूप में रखकर इसे सुखाकर, पीसकर चूर्ण बना ले। इसे प्रतिदिन एक ग्राम की मात्रा में एक गिलास दूध के साथ लगातार एक महीने के सेवन करने से safed daag में फायदा मिलता है।

ताम्बे(कॉपर) के बर्तन

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रात को सोते समय ताम्बे(कॉपर) के बर्तन में पानी भरकर रख दे। सुबह के समय तक कॉपर के आयन्स पानी में घुल जाते है जो की मेलोनिन प्रोडक्शन बढ़ाने में सहायता करता है। इस पानी को सुबह खाली पेट पीने से Safed daag के रोगी को बहुत लाभ मिलता है।

हल्दी और नीम

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हल्दी एक चम्मच और नीम के पत्तो का रस एक चम्मच लेकर इसका पेस्ट बना ले। सुबह के समय लगाकर धूप सेकने से safed daag धीरे-धीरे ख़त्म होने लगता है, रोगी को लाभ मिलता है।

लाल मिटटी

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लाल मिटटी में कॉपर की मात्रा अधिक पायी जाती है जिससे मेलनिन की मात्रा बढ़ती है। एक चम्मच लाल मिटटी और एक चम्मच अदरक मिलाकर पेस्ट बना ले। इस लेप को सफ़ेद दाग की जगह दो मिनट्स मालिश करके छोड़ दे। ऐसा एक महीने तक करने से Safed daag धीरे-धीरे भरने लगता है।

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